हिंदी कहानी – सोने का पेड़ | Sone Ka Ped

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हिंदी कहानी – सोने का पेड़ | Sone Ka Ped | Sona Ka Ped

Sone Ka Ped: प्राचीन समय की बात है एक गांव में एक मछुआरा अपने परिवार के साथ रहता था। परिवार में वह और उसकी पत्नी रहा करती थी मछुआरा गांव के बाहर बहती हुई नदी से मछलियां पकड़ कर बाजार में बेचकर अपना गुजारा करता था।

एक दिन जब वह नदी के किनारे मछली पकड़ने जाता है तो काफी मेहनत करने के बाद भी उसके जाल में किसी भी प्रकार की कोई मछली नहीं फसती है वह बार-बार अपने जाल को निकाल कर देखता है परंतु उसे किसी भी प्रकार की जाल में मछली नहीं मिलती है वह काफी परेशान नजर आता है।

जब वह दोबारा अपने जाल को नदी के अंदर डालता है तो वह जाल किसी कारणवश उस नदी के अंदर फस जाता है जब वह मछुआरा उस जाल को खींचता है तो सोचता है कि उसके जाल में बहुत बड़ी मछली फस गई है वह अपने जाल को जोर से खींचता है परंतु उस जाल को खींच नहीं पाता है काफी जोर लगाने पर वह जान टूट जाता है और आधा जाल हाथ में और आधा नदी में रह जाता है।

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उस मछुआरे के पास मात्र एक ही जाल था जो भी टुट जाता है जाल टूटने पर मछवारा काफी ज्यादा परेशान हो जाता है मछुआरा सोचता है कि यदि मैं आज मछली पकड़ कर बाजार में बेचकर घर पर राशन नहीं लेकर गया तो आज मेरे को भूखा ही सोना पड़ेगा जिससे मेरी पत्नी को भी भूखा सोना पड़ेगा। कुछ भी करके नदी से मछली पकड़ना ही होगा कुछ तो इंतजाम करना ही पड़ेगा उसके बाद मछुआरा एक छड़ी के माध्यम से रस्सी बांधकर कांटे की मदद से मछली पकड़ना शुरू करता है।

शाम होने पर भी उसे एक भी मछली नहीं मिल पाती है वह काफी दुखी हो जाता है और उदास होकर घर आने लगता है तब ही एक दूसरा मछुआरा उसे देखता है और बोलता है कि भाई आज तो आपके पास एक भी मछली नहीं है वह मछुआरा बोलता है कि आज मेरा नसीब खराब है जिस वजह से मेरे को एक भी मछली नहीं मिली और साथ ही मेरा जाल भी टूटकर नदी में रह गया दूसरा मछवारा बोलता है कि आप नया जाल लेकर आ जाओ वह बोलता है कि मेरे पास इतने पैसे नहीं है जिससे मैंने एक नया जाल खरीद सकूं।

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sone ka ped

उसके बाद वह मछुआरा बाजार में कुछ खरीदने के लिए चला जाता है जब वह है बाजार में जाता है तो सामने एक सब्जी बेचने वाला मिलता है वह बोलता है कि आप मेरे को सब्जियां दे दो सब्जी वाला बोलता है कि आप जितनी चाहे सब्जी ले जा सकते हो तब मछुआरा बोलता है की सब्जी तो मैं ले जाऊंगा लेकिन एक बात है सब्जी वाला बोलता है क्या बात है तब मछुआरा बोलता है कि मेरे पास कुछ पैसे नहीं है आज मेरा काम नहीं हुआ इसलिए मेरे पास पैसे नहीं है आपको सब्जियां उधार देनी होगी।

सब्जी वाले के पास अच्छी सब्जियां नहीं थी काफी सड़ी हुई सब्जियां थी वह सोचने लगा कि यह सब्जियां बिकने वाली नहीं है यदि मैं इस मछुआरे को यह सब्जियां देता हूं तो आज नहीं तो कल पैसे मिल ही जाएंगे उसके बाद सब्जी वाला उन सब्जियों को मछुआरे को दे देता है और बोलता है कि पैसे कल जरूर दे जाना मछवारा बोलता है कि भैया कल मैं आपको 100% आपके पैसे लौटा दूंगा।

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उसके बाद मछुआरा अपने घर चले जाता है घर जाते ही उसकी पत्नी देखती है और बोलती है कि आप आ गए इस बैग में क्या लेकर आए हैं तब मछुआरा बोलता है कि इसमें सब्जियां है उसकी पत्नी जैसी सब्जियों को देखती है तो बोलती है कि ऐसी सब्जी लाने की आवश्यकता है यह तो काफी सड़ रही है और मेरे को कुछ पैसे भी दो जिससे मैं कुछ चावल खरीद के ला सकूं मछुआरा बोलता है कि आज मेरा काम कुछ नहीं हुआ इसलिए मैं मेरे पास कुछ पैसे नहीं है तब उसके पत्नी बोलती है कि आज क्या करना होगा उसके बाद मछुआरा बोलता है कि आज इन सब्जियों के माध्यम से ही अपना गुजारा चलाना होगा।

उसके बाद मछुवारे की पत्नी उन सब्जियों को लेकर बनाना शुरू कर दिया बनाने के बाद उन सब्जियों के माध्यम से अपना पेट भर कर रात को सो गए जब सुबह हुई तो मछवारा अपने मछली पकड़ने वाले कांटे को लेकर नदी पर चल जाता है पूरे दिन होने पर उसे एक भी मछली नहीं मिलती है वह काफी उदास होने लगता है और ऊपर वाले भगवान से बोलता है कि हे प्रभु आप कुछ ऐसा चमत्कार करो जिससे कि मेरे जाल में भी कुछ मछलियां बस जाए और मैं अपने खाने का इंतजाम कर सकूं।

कुछ देर बाद मछुआरे के कांटे में एक मछली फस जाती है वह मछली जैसे ही बाहर निकालता है तो एक बूढ़ी औरत उसके सामने आई और उस मछुआरे से बोलने लगी कि बेटा मैंने 2 दिन से कुछ भी नहीं खाया मैं भूख से काफी ज्यादा परेशान हो रही हूं अगर मुझे कुछ भी खाने को नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगी फिर मछुआरा बोलता है मेरा भी शाम के भोजन का कोई इंतजाम नहीं है मछवारा उसके बाद बूढ़ी औरत बोलती है कि तुम तो एक और मछली पकड़ कर अपनी भोजन की व्यवस्था कर लोगे।

लेकिन मैं नहीं कर पाऊंगी उसके बाद बूढ़ी औरत भूख से रोने लगती है अब मछवारा को उस बूढ़ी औरत पर दया आ गई उस मछली को उसको दे देता है उसको लेने के बाद बूढ़ी औरत उसे एक पेड़ छोटा पेड़ देती है और बोलती है कि इसे आंगन में लगाओगे तो अच्छा फल आएंगे।

सोने का पेड़ | Sone Ka Ped | Sona Ka Ped

जब उसके बाद वह बूढ़ी औरत चल जाती है मछुआरा दोबारा नदी से मछली निकालना शुरू करता है लेकिन उसे कुछ भी मछली नहीं मिलती है वह शाम को वापस घर चला जाता है घर आने के बाद उसकी पत्नी उस मछुआरे को काफी ज्यादा सुनाती है बोलती है कि तुम रोज ही खाने की व्यवस्था नहीं कर पाते हो कितने दिन तक हमें भुखा रहना पड़ेगा उसके बाद मछुआरे ने पूरी बात बताई लेकिन उसके पत्नी कुछ सुनने को तैयार नहीं थी वह बोलती है कि कल मैं अपने मायके चली जाऊंगी।

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उसके बाद मछुआरा उस पेड़ को अपने आंगन में लगा देता है और रात के समय सो जाता है जब मछुआरा दूसरे दिन सुबह उठता है और उस पेड़ को देखता है तो वह पेड़ एक सोने के पेड़ में परिवर्तित हो जाता है उसके बाद मछुआरा अपनी पत्नी को बार-बार आवाज देने लगता है जब उसकी पत्नी बाहर आती है और मछुआरे से पूछते कि क्यों इतना चिल्ला रहे हो सुबह-सुबह तब मछुआरा बोलता है कि देखो हमने जो पेड़ लगाए हैं उसकी ओर देखो जब उसकी पत्नी पेड़ कि ओर देखती है तो आश्चर्यचकित रह जाती है।

क्योंकि वह पेड़ एक सोने का पेड़ बन चुका है मछुआरा कहने लगता है कि भगवान ने हमारी पुकार सुन ली है और उस बूढ़ी औरत के माध्यम से हमें यह फल दिया है आज से हम कभी भी भूखे नहीं सोएंगे और कभी भी किसी बात की कमी नहीं रहेगी। उसके बाद दोनों पति पत्नी खुश रहने लगे और धीरे-धीरे गरीबी से हटकर धनवान बन जाते हैं इस प्रकार से सोने के पेड़ से मछुआरा की जिंदगी बदल दी।

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